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أحمد بن محمد بن حنبل الشيباني الإمام

English Ahmad ibn Muhammad ibn Hanbal ash-Shaybāni al-Imām
اردو امام احمد بن محمد بن حنبل شیبانی
বাংলা ভাষা ইমাম আহমাদ ইবন মুহাম্মাদ ইবন হাম্বাল আশ-শাইবানী
हिन्दी इमाम अहमद बिन मुहम्मद बिन हंबल शैबानी
తెలుగు అహ్మద్ బిన్ ముహమ్మద్ బిన్ హంబల్ అష్షైబానీ అల్ ఇమామ్

أحمد بن حنبل

English Ahmad ibn Hanbal
اردو احمد بن حنبل
বাংলা ভাষা আহমাদ ইবনু হাম্বাল
हिन्दी अहमद बिन हंबल
తెలుగు అహ్మద్ బిన్ హంబల్

أبو عبد الله أحمد بن محمد بن حنبل الشيباني الإمام، ولد سنة 164، أحد أئمة الإسلام الأعلام، وأخباره كثيرة مشهورة، قال عنه الإمام الشافعي: (أحمد إمام في ثمان خصال: إمام في الحديث، إمام في الفقه، إمام في اللغة، إمام في القرآن، إمام في الفقر، إمام في الزهد، إمام في الورع، إمام في السنة)، وله موقف مشهود في فتنة خلق القرآن يدل على علمه وصبره، حتى لُقِّب بإمام أهل السنة، بمعنى أنه أظهر السنة في وقت انتشار البدع، وهذا المعنى لكل من يُلقَّب بهذا من أئمة السنة، بخلاف أئمة البدع، فإنهم مَن وضعها وأتى بها، فنسبة السنة لأئمتها نسبة إظهار وانتشار، ونسبة البدع لأئمتها نسبة إصدار وابتكار، ومن آثاره "المسند" و"الزهد" و"الأشربة" و"رسالة في المسيء صلاته" و"الرد على الزنادقة والجهمية" وغير ذلك، ونقل أصحابه عنه نحو ستين ألف مسألة، ومذهبه مستقر في الأصول والفروع، توفي سنة 241.

English He is Abu ‘Abdullah Ahmad ibn Muhammad ibn Hanbal ash-Shaybāni al-Imām. He was born in 164 AH. He is one of the renowned Imams of Islam and his reports are famous and so many. Imam Ash-Shāfi‘i said about him: "Ahmad is an Imam (leader) in eight: he is an Imam in Hadīth, an Imam in Fiqh, and Imam in language, an Imam in the Qur’an, and Imam in poverty, an Imam in asceticism, and Imam in religious prudence, and an Imam in the Sunnah." His stance during the Fitnah (trial) of the Creation of the Qur’an showed his knowledge and patience to the extent that he was called 'the Imam of Ahl-us-Sunnah', i.e., he demonstrated the Sunnah at the time when the religious innovations were widespread. This meaning applies to all those who are from the Imams of Sunnah. However, the title 'Imams of the religious innovations' refers to those who introduced such religious+ innovations. Therefore, the Sunnah is attributed to its Imams who helped in circulating and spreading it; whereas, the religious innovations are attributed to their Imams who invented and introduced them. Some of his authorships include: 'Al-Musnad', 'Az-Zuhd', 'Al-Ashribah', 'Risālah fi al-Musī’ Salātih', 'Ar-Radd ‘ala az-Zanādiqah wa al-Jahmiyyah', etc. His followers reported around sixty thousand issues on his authority and his school of Fiqh (doctrine) is well-established in the fundamental and subsidiary issues. He died in 241 AH.
اردو ابو عبداللہ امام احمد بن محمد بن حنبل شیبانی، سنہ 164 میں پیدا ہوئے، اسلام کے ایک بڑے امام تھے، ان سے متعلق بہت سی باتیں بڑی مشہور ہیں، ان کے بارے میں امام شافعی نے کہا ہے : "احمد آٹھ جہتوں سے امام تھے : فن حدیث میں امام تھے، فقہ میں امام تھے، لغت میں امام تھے، قرآن میں امام تھے، فقر میں امام تھے، زہد میں امام تھے، تقوی میں امام تھے اور سنت میں امام تھے۔" خلق قرآن کے فتنے میں باشاد وقت کے سامنے ان کے اپنے موقف پر ڈٹے رہنے اور اذیت برداشت کرنے کا واقعہ بہت مشہور ہے، یہ واقعہ دراصل ان کے علم و صبر پر دلالت کرتا ہے، اسی کے بعد ان کو امام اہل سنت کا لقب دیا گیا، کیوںکہ انھوں نے اس وقت سنت کا اظہار کیا تھا جب بدعت پھیل چکی تھی۔ سنت کے جتنے بھی اماموں کو یہ امام اہل سنت کا لقب ملا ہوا ہے، اس کا معنی یہی ہے، جب کہ بدعت کے اماموں کا معاملہ اس کے برخلاف ہے،کیوںکہ وہ ایسے لوگ ہیں جنھوں نے بدعت کو گھڑنے اور اسے فروغ دینے کا کام کیا۔ اس طرح دیکھا جائے تو سنت کے اماموں کی جانب اس کی نسبت اسے ظاہر کرنے اور پھیلانے پر مبنی ہے، جب کہ بدعت کی نسبت اس کے اماموں کی جانب اسے صادر کرنےاور گھڑنے پر مبنی ہے۔ انھوں نے "المسند"، "الزهد"، "الأشربة"، "رسالة في المسيء صلاته" اور "الرد على الزنادقة والجهمية" وغیرہ جیسی تصنیفات چھوڑی ہیں،ان کے شاگردوں نے ان سے لگ بھگ 60 ہزار مسائل نقل کیے ہیں، اصولی اور فروعی مسائل میں ان کا مسلک ایک مستقل مسلک کی حیثیت رکھتا ہے، سنہ 241ھ میں وفات پائی۔
বাংলা ভাষা ইমাম আবূ আব্দুল্লাহ আহমাদ ইবন মুহাম্মাদ ইবন হাম্বাল আশ-শাইবানী। তিনি ১৬৪ হিজরীতে জন্মগ্রহণ করেন। তিনি ইসলামের বিদ্বান ও ইমামদের একজন ছিলেন। তার জীবনী সংক্রান্ত আলোচনা অনেক ও প্রসিদ্ধ। তার সম্পর্কে ইমাম শাফেয়ী বলেছেন: “আহমাদ আটটি বিষয়ের ইমাম ছিলেন: হাদীসের ইমাম, ফিকহের ইমাম, ভাষার ইমাম, কুরআনের ইমাম, দরিদ্রতার ইমাম, যুহদ বা দুনিয়া বিমূখতার ইমাম, আল্লাহ ভীরুতার ইমাম এবং সুন্নাহর ইমাম।” খলকে কুরআন তথা কুরআন আল্লাহর সৃষ্ট কী না (মুতাযিলাদের মতবাদ) এর মাসআলাতে তার অবস্থান অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ছিল, যা তার ইলম ও সবরের প্রতি ইঙ্গিত করে। এমনকি এ কারণে তাকে ‘ইমামু আহলিস সুন্নাহ’ বলা হয়। অর্থাৎ তিনি বিদ‘আতের প্রসারের সময়ে সুন্নাহকে প্রতিষ্ঠিত করেছেন। আর অন্যান্য যাদেরকে আহলুস সুন্নাহর ইমাম বলা হয়, তাও এই অর্থেই। এর বিপরীত হচ্ছে বিদ‘আতীদের ইমামগণ; কেননা তারা বিদ‘আতকে তৈরী করে এবং তা (সমাজে) নিয়ে আসে। সুতরাং সুন্নাহর ইমামগণের প্রতি সুন্নাহর সম্পৃক্ততা হচ্ছে তা প্রতিষ্ঠা ও প্রসারের কারণে। আর বিদ‘আতের ইমামদের প্রতি বিদ‘আতের সম্পৃক্ততা হচ্ছে তা তৈরী করা এবং নতুনভাবে তা নিয়ে আসার কারণে। ইমাম আহমাদের গুরুত্বপূর্ণ অবদানের মধ্যে রয়েছে: আল-মুসনাদ, আয-যুহদ, আল-আশরিবাহ, রিসালাতুন ফিল মুসীই সলাতাহ, আর-রদ্দু আলায যানাদিকাতি ওয়াল জাহামিয়্যাহ এবং অন্যান্য। তার ছাত্ররা তার কাছ থেকে ষাট হাজার মাসআলাহ বর্ণনা করেছেন। এবং তার মাযহাব উসূলী ও ফুরূয়ী (মৌলিক ও প্রশাখাগত) উভয় ধরণের মাসআলা সহকারে প্রতিষ্ঠিত। তিনি ২৪১ হিজরীতে মৃত্যুবরণ করেন।
हिन्दी इमाम अबू अब्दुल्लाह अहमद बिन मुहम्मद बिन हंबल शैबानी। 164 हिजरी में पैदा हुए। इस्लाम के बड़े इमामों में से एक हैं। उनसे संबंधित बहुत-सी बातें बड़ी मशहूर हैं। उनके बारे में इमाम शाफ़िई कहते हैं : (अहमद आठ शास्त्रों के इमाम हैं। वह हदीस के इमाम हैं, फ़िक़्ह के इमाम हैं, भाषा के इमाम हैं, क़ुरआन के इमाम हैं, निर्धनता के इमाम हैं, निस्पृहता के इमाम हैं, परहेज़गारी के इमाम हैं और सुन्नत के इमाम हैं।) क़ुरआन के सृष्टि होने या ना होने के मसले पर वह अपने मत पर डटे रहे और यातनाएँ सहीं, जो उनके ज्ञान तथा धैर्य का परिचायक है। इसी घटना के बाद उनको अह्ल-ए-सुन्नत के इमाम का लक़ब मिला। इसका अर्थ यह है कि उन्होंने उस समय सुन्नत को मज़बूत करने का काम किया, जब हर ओर बिदअत फैल चुकी थी। इसी मायने में और भी लोगों को अह्ल-ए-सुन्नत के इमाम की उपाधि मिली हुई है। इसके विपरीत बिद्अत के इमाम हैं, जो उसे जन्म देते तथा फैलाते हैं। अतः सुन्नत के उलेमा की ओर सुन्नत की निस्बत, उसपर अमल करने तथा उसे फ़ैलाने के कारण है, जबकि बिदअती उलेमा की ओर बिदअत की निस्बत उसे जन्म देने तथा उसपर अमल करने के कारण है। इमाम अहमद की कुछ किताबों के नाम इस प्रकार हैं : "अल-मुसनद", "अज़-ज़ुह्द", "अल-अशरिबह", "रिसाला अल-मुसी फ़ी सलातिहि" तथा "अर-रद्द अला अज़-ज़नादिक़ह व अल-जहमिय्यह" आदि। उनके शिष्यों ने उनसे लगभग साठ लाख मसअले नक़ल किए हैं। शरीयत के अक़ीदा तथा कर्म संबंधित मामलों में उनका मसलक एक स्थापित मसलक है। 241 हिजरी में मृत्यु को प्राप्त हुए।
తెలుగు ఇమాం అబూ అబ్దుల్లాహ్ అహ్మద్ బిన్ ముహమ్మద్ బిన్ హంబల్ అష్షైబానీ. హిజ్రీ 164లో జన్మించారు. ఇస్లాం యొక్క గొప్ప ఇమాములలో ఒకరు. ఆయనకి సంబంధించిన అనేక విషయాలు చాలా ప్రసిద్ధి చెందాయి. ఇమాం షాఫయీ ఆయన గురించి ఇలా అన్నారు: (అహ్మద్ ఎనిమిది శాస్త్రాలలో ఆరితేరిన ఇమాం. ఆయన హదీసు యొక్క ఇమాం, ఆయన ఫిఖాలో ఇమాం, భాషలో ఇమాం, ఖుర్ఆనులో ఇమాం, పేదరికంలో ఇమాం, భక్తిలో ఇమాం, పవిత్రతలో ఇమాం మరియు సున్నతులో ఇమాం.) ఖుర్ఆను సృష్టియా కాదా అనే అంశంపై తన అభిప్రాయం పై విశ్వాసం మీద నిలబడి, చిత్రహింసలను భరించారు, ఇది ఆయన జ్ఞానం మరియు సహనానికి చిహ్నం. ఈ సంఘటన తరువాత, అతను అహ్లేసున్నతు యొక్క ఇమాం అనే బిరుదును పొందారు. బిద్అతు సర్వత్రా వ్యాపించిన సమయంలో సున్నతును బలోపేతం చేయడానికి ఆయన తీవ్రమైన కృషి చేశారని దీని అర్థం. ఈ కోణంలో ఇతర వ్యక్తులు అహ్లేసున్నతు ఇమాం అనే బిరుదును పొందారు. దీనికి విరుద్ధంగా బిద్అతు ఇమాములు ఉన్నారు వారు బిద్అతును పుట్టించేవారు దాన్నివ్యాప్తి చేసేవారు. అయితే ఉలమాలకు సున్నతు ఆపాదించడమనేది వారు సున్నతు ప్రకారం ఆచరించడం మరియు దాని ప్రచారం కారణంగా ఉంటుంది. అయితే బిద్అతి ఉలమాల పట్ల బిద్అత్ యొక్క ఆపాదన వాటిని పుట్టించడం ఆచరించడం కారణంగా ఉంటుంది. ఇమాం అహ్మద్ యొక్క కొన్ని రచనలు ఇవి:"అల్ ముస్నద్","అజ్జుహద్","అల్ అష్'రిబా","రిసాలతు ఫీ మసీవు సలాతిహీ","అర్రద్దు అలా అజ్జనాదిఖ వల్ జహ్మియ్య " మొదలైనవి. ఆయన శిష్యులు అతని నుండి దాదాపు 60 వేల (మసాయిల్) ప్రశ్నోత్తరాలు సమీకరించారు. షరీఅతు యొక్క (ఉసూల్ వల్ ఫురూ) మూలసూత్రాలు మరియు ఉపఆదేశాలకు సంబంధిత విషయంలో ఆయన మస్లక్ స్థిరంగా ఉంది.హిజ్రీ 241వ సంవత్సరంలో ఆయన కన్నుమూశారు.

تاريخ دمشق (5/252) تاريخ الإسلام (5/1010) طبقات الفقهاء (ص 91) الأعلام للزركلي (1/ 203)، المدخل المفصل إلى فقه الإمام أحمد بن حنبل.